Tuesday, April 21, 2026
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सोनारी–रांची कनेक्टिविटी और धालभूमगढ़ एयरपोर्ट विकास की दिशा में जरूरी कदम : एके श्रीवास्तव

आदित्यपुर: जमशेदपुर सिटीजन फोरम के अध्यक्ष एके श्रीवास्तव ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि 19 अप्रैल के एक दैनिक अखबार में धालभूमगढ़ हवाई अड्डा के त्वरित निर्माण एवं जमशेदपुर से रांची, कोलकाता और भुवनेश्वर के लिए नियमित हवाई सेवा प्रदान करने के संबंध में प्रमुख रूप से समाचार प्रकाशित हुआ है। झारखंड विशेष रूप से कोल्हान जो खान खनिज वन संपदा से भरपूर है एवं टाटा समूह की बृहद इकाइयां जमशेदपुर में ही स्थित है इसके उचित दोहन नियोजन राजस्व की वृद्धि और क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए धालभूमगढ़ हवाई अड्डा अत्यंत आवश्यक है जमशेदपुर देश के प्रमुख औद्योगिक शहरों में अपनी अलग पहचान रखता है, लेकिन यह विडंबना ही है कि यहां के लोगों को आज भी सोनारी से हवाई यात्रा के लिए कोलकाता पर निर्भर रहना पड़ता है। कोलकाता अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा होने के कारण वहां से देश एवं विदेश के लगभग सभी बड़े शहरों के लिए उड़ानें उपलब्ध हैं, परंतु जमशेदपुर से कोलकाता तक पहुंचना समय, खर्च और असुविधा—तीनों का कारण बनता है। ऐसी स्थिति में एक त्वरित और व्यवहारिक समाधान है—सोनारी एयरपोर्ट से रांची के लिए प्रतिदिन नियमित हवाई सेवा शुरू करना। रांची एयरपोर्ट से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद सहित कई प्रमुख शहरों के लिए सीधी उड़ानें उपलब्ध हैं। यदि जमशेदपुर से रांची तक तेज हवाई संपर्क स्थापित हो जाता है, तो यात्रियों को देश के किसी भी बड़े शहर तक पहुंचने में काफी सुविधा होगी। वर्तमान में जमशेदपुर से रांची सड़क मार्ग से पहुंचने में 2 से 3 घंटे का समय लगता है, जबकि हवाई मार्ग से यह दूरी बहुत कम समय में तय की जा सकती है। अनुमानतः प्रतिदिन 120 से 150 यात्री रांची की यात्रा करते हैं। यदि छोटे विमानों के माध्यम से दिन में 2–3 बार उड़ानें संचालित की जाएं, तो आपातकालीन और विशेष परिस्थिति के लिए यह सेवा पूरी तरह सफल और उपयोगी साबित हो सकती है। इस दिशा में झारखंड सरकार की सक्रिय भूमिका अत्यंत आवश्यक है। UDAN योजना के अंतर्गत इस रूट को शामिल कर एयरलाइंस को आर्थिक सहयोग दिया जाना चाहिए। साथ ही, ATF (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) पर टैक्स में छूट देकर उड़ानों को किफायती बनाया जा सकता है। Indigo, SpiceJet, Alliance Air जैसी कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर नियमित उड़ान सेवा सुनिश्चित की जानी चाहिए। सोनारी एयरपोर्ट के बुनियादी ढांचे को भी इस दिशा में सुदृढ़ करना आवश्यक है।एक अभिनव और व्यावहारिक पहल यह भी हो सकती है कि सोनारी में ही यात्रियों को चेक-इन और बोर्डिंग पास की सुविधा दी जाए तथा उन्हें और उनके सामान को सुरक्षित बस के माध्यम से रांची एयरपोर्ट तक पहुंचाया जाए। इससे यात्रियों का समय बचेगा और यात्रा अधिक व्यवस्थित होगी। हालांकि, इस व्यवस्था में सामान की सुरक्षा सर्वोपरि होगी, जिसके लिए बारकोड/QR कोड टैगिंग, GPS युक्त बस, CCTV निगरानी और सील बंद प्रणाली जैसे उपाय अनिवार्य होंगे।दीर्घकालिक समाधान के रूप में धालभूमगढ़ एयरपोर्ट का निर्माण अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार की योजना के अनुसार इस एयरपोर्ट के लिए लगभग 4000–4500 एकड़ भूमि की आवश्यकता है, लेकिन भूमि अधिग्रहण में काफी विलंब हो रहा है। स्थानीय सांसद विद्युत वरण महतो के प्रयासों से कुछ प्रगति अवश्य हुई है, स्थानीय चैंबर ऑफ़ कॉमर्स के सदस्यों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया जताते हुए धरना प्रदर्शन भी किया है परंतु अब तक उचित मात्रा में भूमि उपलब्ध नहीं हो पाई है । यदि इस परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाता है, तो यहां से देश के प्रमुख शहरों के साथ-साथ भविष्य में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की भी संभावना बनेगी। इससे झारखंड में निवेश, व्यापार और पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। धालभूमगढ़ एयरपोर्ट को लाभकारी बनाने के लिए इसे क्षेत्रीय विकास से जोड़ना भी आवश्यक है। घाटशिला–मुसाबनी क्षेत्र की बंद पड़ी खदानों को पुनः चालू करने, बहरागोड़ा क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले धान उत्पादन और चावल के निर्यात को बढ़ावा देने, तथा Central Rice Research Institute (दारीसोल, घाटशिला) के संसाधनों का उपयोग करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।इसके साथ ही बहरागोड़ा क्षेत्र में काजू, हर्रा बहेरा एवं अन्य वन उत्पादों के लिए प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जानी चाहिए। घाटशिला से बहरागोड़ा तक के क्षेत्र में व्यावसायिक और आवासीय विकास, मॉल, पर्यटन सुविधाएं और औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर इसे एक समग्र आर्थिक कॉरिडोर के रूप में स्थापित किया जा सकता है। बहरागोड़ा का भौगोलिक स्थान, जो ओडिशा और पश्चिम बंगाल की सीमाओं से जुड़ा है, इसे औद्योगिक और वाणिज्यिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है। यदि यहां निवेशकों को आकर्षित करने के लिए अनुकूल वातावरण और सुविधाएं प्रदान की जाएं, तो कोल्हान क्षेत्र तीव्र गति से विकास कर सकता है।यह भी आवश्यक है कि राज्य सरकार नई औद्योगिक नीति में इस क्षेत्र को प्राथमिकता दे। जब तक एयरपोर्ट परियोजना को लाभकारी स्वरूप नहीं दिया जाएगा, तब तक बड़े पैमाने पर सरकारी या निजी निवेश संभव नहीं हो पाएगा। इसलिए एयरपोर्ट के साथ-साथ समग्र आर्थिक विकास की योजना बनाना अनिवार्य है।अंततः, सोनारी से रांची हवाई सेवा जहां त्वरित राहत प्रदान कर सकती है, वहीं धालभूमगढ़ एयरपोर्ट झारखंड के भविष्य के विकास की आधारशिला बन सकता है। अब आवश्यकता है कि सरकार, प्रशासन और उद्योग जगत मिलकर इस दिशा में ठोस और शीघ्र निर्णय लें, ताकि राज्य को वह हवाई कनेक्टिविटी मिल सके जिसकी उसे लंबे समय से आवश्यकता है। हवाई अड्डा को मूर्त रूप देने के लिए सरकार और निजी क्षेत्र को मिलकर वहां पर ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए जिसके फल स्वरुप हवाई अड्डा में जो निवेश होगा वह आरंभ में भले लाभकारी ना हो लेकिन कुछ दिन के बाद लाभकारी योजना सिद्ध होगा। निवेश के साथ लाभ हानि का प्रश्न हमेशा लगा रहेगा। झारखंड गठन के तुरंत बाद ही चाकुलिया धालभूमगढ़ हवाई अड्डा के विषय में सदैव चर्चा होती आ रही है लेकिन यह विडंबना है अभी तक इसमें कोई ठोस कदम सरकार ने नहीं उठाया।

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Lb Shastri
मुख्य संपादक सह प्रोपराइटर पूर्व पत्रकार, प्रभात खबर और दैनिक भास्कर, जमशेदपुर

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