आदित्यपुर / सरायकेला । खनिज संशोधन विधेयक के खिलाफ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) द्वारा 7 सितंबर को प्रस्तावित आंदोलन की तैयारियाँ तेज़ हो गई हैं। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव जाकर विधेयक के प्रावधानों व संभावित प्रभावों से जनता को अवगत कराया और आंदोलन को व्यापक जनाधार देने के लिये रणनीतियाँ बनाईं।
झामुमो के वरिष्ठ नेता और शिक्षाविद केपी सोरेन ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि यह विधेयक झारखंड सरकार को कमजोर करने के उद्देश्य से लाया जा रहा है। सोरेन ने कहा कि केंद्र पर राज्य का लगभग ₹1,36,000 करोड़ बकाया है और उस राशि का भुगतान टालने के लिए केंद्र विभिन्न तरीकों का सहारा ले रहा है। उन्होंने कहा कि इसी कारण जल्दबाज़ी में यह कानून लाया जा रहा है।
सोरेन ने कड़ा रूख अपनाते हुए कहा कि झामुमो किसी भी स्थिति में इस विधेयक को कानून नहीं बनने देगा और इसके खिलाफ “अंतिम और निर्णायक” लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे जनजागरण अभियान को और तेज़ करें, लोगों तक विधेयक की जानकारी पहुँचाएँ और अधिक से अधिक लोगों को आंदोलन से जोड़ें।
पार्टी ने बताया कि इस आंदोलन की पहली झलक 7 सितंबर को दिखाई देगी और उसके बाद प्रदेश स्तर पर बड़े पैमाने पर आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर आगे बढ़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सरायकेला-खरसावां जिला में ऐतिहासिक आंदोलन होगा। बैठकों में जनसंपर्क अभियान, संगठनात्मक रणनीति और स्थानीय स्तर पर लोगों को शामिल करने के तरीकों पर चर्चा जारी है। स्थानीय पदाधिकारियों ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में बैठकें और खोज-खबर अभियान सक्रिय हैं ताकि आम जनता को विधेयक के संभावित लाभ-हानि की स्पष्ट जानकारी मिल सके। पुलिस और प्रशासन द्वारा सुरक्षा व जन-व्यवस्था के दृष्टिकोण से क्या कदम उठाए जाएंगे, इस पर अभी वृहद स्तर पर कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं हुई है। झामुमो के प्रस्तावित आंदोलन को लेकर क्षेत्रीय राजनीतिक व सामाजिक प्रतिक्रिया और सरकारी रुख पर अगले कुछ दिनों में निगाहें टिकी रहेंगी। जनता के साथ होने वाली बैठकों और 7 सितंबर के आयोजन के बाद ही आंदोलन की दिशा स्पष्ट रूप से सामने आएगी।
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