Monday, April 13, 2026
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उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार रहे नंदू पटेल ने राज्य क्रिकेट संघ (जेएससीए) के वर्ष 2025-28 के लिए हुए चुनाव को रद्द कर दोबारा चुनाव कराने को लेकर झारखंड उच्च न्यायालय में किया याचिका दायर

जमशेदपुर : उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार रहे नंदू पटेल ने राज्य क्रिकेट संघ (जेएससीए) के वर्ष 2025-28 के लिए हुए बहुप्रतीक्षित चुनाव को झारखंड उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर समस्त चुनावी प्रक्रिया को रद्द कर पुनः निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव कराने की मांग की है। उन्होंने 107 वोटों को  बायलॉज के खिलाफ बताते हुए याचिका में आरोप लगाया गया है कि 18 मई को हुए चुनाव में कुल 107 ऐसे वोट डाले गए जो जेएससीए के नियमों और न्याय के मूल सिद्धांतों के खुले उल्लंघन को दर्शाते हैं। पटेल ने कहा कि यह चुनाव केवल सत्ता पाने की होड़ नहीं, बल्कि संघ में व्याप्त अनियमितताओं के खिलाफ एक सुधारवादी प्रयास था। उन्होंने दावा किया कि यदि इस तरह के वोट मान्य किए जाते हैं, तो इससे न केवल जेएससीए की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगेगा, बल्कि खेल और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के साथ भी अन्याय होगा।

नंदू पटेल ने दायर याचिका में जेएससीए के तीन प्रमुख बायलॉज का हवाला देते हुए बताया कि किस तरह से उनका उल्लंघन हुआ :

1. बायलॉज 2(d): राज्य के बाहर रहने वाले सदस्यों को मिली अवैध सदस्यता

बायलॉज के अनुसार, “लाइफ मेंबर केवल वही व्यक्ति बन सकते हैं जो झारखंड राज्य के निवासी हों और 18 वर्ष से अधिक आयु के हों।” लेकिन याचिका में कहा गया है कि 2004 के बाद झारखंड से बाहर रहनेवाले लगभग दो दर्जन व्यक्तियों को अवैध रूप से सदस्यता दी गई, जो कि जेएससीए के क्षेत्राधिकार का अतिक्रमण है। इसके अतिरिक्त एक सदस्य को 16 वर्ष की आयु में ही सदस्य बना दिया गया, जो न्यूनतम आयु सीमा का उल्लंघन है।

बायलॉज 5(a)(iii): पांच वर्षों तक आम सभा से अनुपस्थित रहे 31 सदस्य

बायलॉज 5(a)(iii) के अनुसार, “यदि कोई सदस्य लगातार पांच वर्षों तक एक भी वार्षिक आम सभा में भाग नहीं लेता है, तो उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त मानी जाएगी।” पटेल ने आरोप लगाया कि 31 ऐसे सदस्यों को COM (कमिटी ऑफ मैनेजमेंट) ने जानबूझकर बनाए रखा, जबकि उनकी सदस्यता नियमों के अनुसार स्वतः समाप्त हो जानी चाहिए थी। यह कार्य संघ की आंतरिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

3. बायलॉज 40: संशोधनों पर सुप्रीम कोर्ट की अनुमति आवश्यक

बायलॉज 40 के अनुसार, “कोई भी नियम संशोधन मान्य नहीं होगा जब तक उसे माननीय सुप्रीम कोर्ट की अनुमति प्राप्त न हो।” पटेल ने COM पर आरोप लगाया कि उसने इस बायलॉज को दरकिनार करते हुए मनमाने तरीके से नियमों में संशोधन कर दिया, जिससे पूरी चुनाव प्रक्रिया की वैधता संदिग्ध हो गई है।

“गलत को सही ठहराना अन्याय होगा” – नंदू पटेल

पत्रकारों से बातचीत में नंदू पटेल ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “जेएससीए में जो गलत चल रहा था, उसे सुधारने की नेक नियत के साथ मैंने चुनाव लड़ा था। लेकिन जिस तरह से बायलॉज का उल्लंघन कर चुनाव संपन्न कराया गया, वह संघ के लोकतांत्रिक चरित्र को आहत करता है। इसे चुपचाप स्वीकार करना अन्याय को मौन समर्थन देने जैसा होता, इसलिए मैंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। मुझे पूरा विश्वास है कि न्याय मिलेगा।”

18 मई को अजय नाथ शहदेव गुट ने किया था क्लीन स्वीप

ज्ञात हो कि 18 मई 2025 को हुए चुनाव में अजय नाथ शहदेव के नेतृत्व वाले गुट ने सभी पदों पर एकतरफा जीत दर्ज की थी।

अजय नाथ शहदेव – अध्यक्ष

संजय पांडेय – उपाध्यक्ष

सौरव तिवारी – सचिव

अमितावा घोष – कोषाध्यक्ष

शाहबाज नदीम – संयुक्त सचिव

सहित अन्य सभी पदों पर भी अजय गुट के प्रत्याशियों को सफलता मिली थी। यह चुनाव जेएससीए के इतिहास में अब तक का सबसे निर्णायक चुनाव माना गया था, लेकिन अब इसपर संकट के बादल मंडराते दिखाई दे रहे हैं।

कानूनी प्रक्रिया शुरू, सुनवाई की तिथि जल्द संभावित

नंदू पटेल की ओर से दायर याचिका पर झारखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई की संभावना अगले कुछ सप्ताहों में है। यदि अदालत याचिका में उठाए गए बिंदुओं को गंभीर मानती है, तो चुनाव प्रक्रिया को निरस्त कर दोबारा मतदान की संभावना बन सकती है।

जेएससीए प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं

इस पूरे मामले पर अब तक जेएससीए के प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन सूत्रों के अनुसार, COM के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी कानूनी टीम के साथ विचार-विमर्श कर रहे हैं। यदि मामला आगे बढ़ा तो यह झारखंड के क्रिकेट प्रशासन में एक बड़ी कानूनी लड़ाई का रूप ले सकता है।

खेल और संस्था की साख दांव पर

जेएससीए, जो राज्य में क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था है, उस पर इस प्रकार के गंभीर आरोप न केवल संगठन की साख को प्रभावित करते हैं, बल्कि खिलाड़ियों और क्रिकेट प्रेमियों के विश्वास को भी ठेस पहुंचाते हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि झारखंड उच्च न्यायालय इस पूरे विवाद पर क्या निर्णय देता है और क्या झारखंड क्रिकेट को एक पारदर्शी प्रशासनिक ढांचा मिल पाता है।

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Lb Shastri
मुख्य संपादक सह प्रोपराइटर पूर्व पत्रकार, प्रभात खबर और दैनिक भास्कर, जमशेदपुर

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