लखनऊ : दलित इंडियन चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ( डिक्की) झारखंड प्रदेश के अध्यक्ष नवनीत कुमार उर्फ कन्हैया के फूफा जी डाॅ शंभूनाथ ( उम्र लगभग 78 वर्ष )का लखनऊ में निधन हो गया। वे दलित (पासवान) समाज के पहले आईएएस, यूपी सरकार के सेवानिवृत्ति मुख्य सचिव और साहित्यकार थे।

यूपी के पूर्व मुख्य सचिव, साहित्यकार डॉ.शंभुनाथ का शनिवार देर शाम लखनऊ में हिन्दी साहित्य संस्थान के निराला सभागार में चल रहे पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान हृदयगति रुकने से निधन हो गया। मंच पर जिस समय वह वक्तव्य दे रहे थे, तभी वह बेहोश हो गए। अस्पताल ले जाने पर उन्हें मृत करार दिया गया। उनके निधन से साहित्यजगत और नौकरशाहों में शोक की लहर है। स्वर्गीय डॉक्टर शंभू नाथ करण के मृत्यु काल की कहानी सुनाते-सुनाते स्वयं काल में शमा गए ।

विदित हो कि स्व. डॉ. शंभुनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त होने के अगले ही दिन वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शंभुनाथ को एक जुलाई 2007 का उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया था।अपने दो साल के कार्यकाल के दौरान डॉ. शंभुनाथ ने हिन्दी भाषा को ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए कई यादगार फैसले लिए। इसके साथ ही हिन्दी संस्थान के प्रेक्षागृह और सभागार के नाम यशपाल, निराला और प्रेमचन्द के नाम पर उन्होंने ही रखा। दुनिया से विदा होने से पहले डॉ. शंभुनाथ काल पर एक कहानी सुना रहे थे। बता रहे थे कि काल कैसे राजा का पीछा करता है। इसी वक्त उनकी तबीयत बिगड़ गई और दुनिया को अलविदा कह दिया। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान की सम्पादक डॉ. अमिता दुबे ने बताया कि डॉ. शंभुनाथ के साथ काम करने से मेरे और संस्थान के अन्य अधिकारियों के व्यक्तित्व में रचनात्मक विकास हुआ। प्रशासनिक सेवा से पूर्व डॉ. शंभुनाथ एक प्राधयापक भी रहे, जो उनके व्यक्तित्व में दिखता था। किसी चीज को सिखाने का उनका तरीका अन्य सभी अधिकारियों से अलग था। उनके पीछे उनकी विधवा पत्नी सहित दो पुत्र का एक भरा पूरा परिवार है। उनका रांची स्थित हरमू में अपना मकान है जहां वे कभी परिवार के साथ रहा करते थे।









