झिलिंगगोड़ा, सरायकेला : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने कहा कि सरहुल पर्व (बाहा बोंगा) आदिवासी समाज के एक महापर्व है, जिसे समाज के लोग प्राकृतिक रूप एवं पवित्र भाव से अपने-अपने गांव में जाहेरा स्थान में मानते हैं। आज इस पावन बला में आदिवासी समाज अपने जल, जंगल, जमीन और अस्मिता की रक्षा के लिए बांग्लादेशी घुसपैठ को झारखंड से खदेड़ने का संकल्प लिया है। इसका उलगुलान संथाल की धरती पर 23 मार्च से शुरुआत होगा। वे बुधवार को समाज की ओर से झिलिंगगोड़ा में आयोजित सरहुल महापर्व (बाहा बोंगा) के अवसर पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए बोल रहे थे।

उन्होंने कहा की झारखंड में आदिवासी के जल, जंगल और जमीन के साथ अस्मिता भी खतरे में पड़ गया है। बांग्लादेशी घुसपैठी एक साजिश के तहत हमारी बहु-बेटी को बहला फुसलाकर अपने जाल में फंसा लेते हैं और उसके माध्यम से ज़मीन पर कब्जा कर रहे हैं। इसलिए समाज और अस्मिता की रक्षा के लिए बांग्लादेशी घुसपैठी को यहां से भागना ही होगा। उन्होंने अपने 5 महीने के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह से राज्य और राज्य की जनता के विकास के लिए कैलेंडर तैयार किया था, अगर वर्तमान सरकार उस पर काम करेगी तो राज्य का सर्वांगीण विकास होगा।
पूरे परिवार सरहुल महापर्व ( बाहा बोंगा) में हुए शामिल

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन अपने पूरे परिवार के साथ सरहुल महापर्व (बाहा बोंगा)में शामिल हुए। परिवार के प्रत्येक सदस्य पारंपरिक पोशाक धारण किए हुए थे। सर्व प्रथम सुबह में जाहेर स्थान में परंपरागत तरीके से पूजा अर्चना किया। जबकि शाम में लोक नृत्य और संगीत में पूरे परिवार शामिल हुए। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने जमकर नगारा बाजया।
जबकि अन्य सदस्य पारंपरिक नृत्य कर सरहुल पर्व का भरपूर आनंद उठाया। इसमें उनके परिवार के चारों पुत्र सिंबल सोरेन उर्फ वकील सोरेन, बाबूलाल सोरेन ,बबलू सोरेन और आकाश सोरेन के अलावा सभी बहू-बेटी और नाती-पोता शामिल थे।









