Monday, April 13, 2026
No menu items!
Homeउद्योग और व्यवसायसिंहभूम चैम्बर ने जीएसटी ग्रिवांस रिड्रेसल कमिटि की मीटिंग में चीफ कमिश्नर...

सिंहभूम चैम्बर ने जीएसटी ग्रिवांस रिड्रेसल कमिटि की मीटिंग में चीफ कमिश्नर सेन्ट्रल जीएसटी को विभिन्न मांगों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा

जमशेदपुर: सिंहभूम चैम्बर का एक प्रतिनिधिमंडल जीएसटी ग्रिवांस रिड्रेसल कमिटि की रांची में आयोजित बैठक में शामिल होकर जीएसटी से संबंधित विभिन्न सुझावों का ज्ञापन सौंपा। इस बैठक में चीफ सेन्ट्रल जीएसटी आयुक्त श्री प्रदीप सक्सेना, प्रिंसिपल सेन्ट्रल जीएसटी आयुक्त योगेश अग्रवाल, जमशेदपुर सेन्ट्रल जीएसटी आयुक्त ब.के. गुप्ता, सेन्ट्रल जीएसटी आयुक्त ऑडिट श्री धर्मजीत कुमार, सेन्ट्रल जीएसटी आयुक्त अपील श्री रवि सेल्वन, सेन्ट्रल जीएसटी अपर आयुक्त श्री सुबोध कुमार, स्टेट जीएसटी अपर आयुक्त श्री अवधेश मेहरा ने झारखण्ड राज्य के विभिन्न व्यवसायिक एवं प्रोफेशनल संगठनों के आये प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर जीएसटी से संबंधित उनके सुझाव लिये। यह जानकारी मानद महासचिव मानव केडिया ने दी। महासचिव मानव केडिया निम्नलिखित सुझाव कमिटि की बैठक में रखे –

1) प्रथम अपीलीय प्राधिकरण को तीन माह से अधिक की देरी माफ करने का अधिकार दिया जाना चाहिए, विशेषकर जब करदाता को वास्तविक कठिनाई हो। हाईकोर्ट जाना सभी के लिए व्यावहारिक नहीं होता, ऐसे में यह प्रावधान करदाताओं को सुलभ राहत देगा और न्यायसंगत कर प्रणाली को बढ़ावा देगा।

2) हम आग्रह करते हैं कि जमशेदपुर व बोकारो जैसे प्रमुख शहरों में प्रथम अपीलीय प्राधिकरण की स्थापना की जाए। वर्तमान में केवल रांची में इसका केंद्रीकरण करदाताओं व पेशेवरों के लिए असुविधाजनक है।

3)सिंहभूम चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने आग्रह किया है कि झारखंड में जीएसटी ट्रिब्यूनल का शीघ्र गठन किया जाए। वर्तमान में ट्रिब्यूनल की अनुपस्थिति के कारण करदाताओं को अपील के लिए अन्य राज्यों या उच्च न्यायालय जाना पड़ता है, जिससे समय और संसाधनों की हानि होती है।

उपाध्यक्ष, वित्त एवं कराधान अधिवक्ता राजीव अग्रवाल ने निम्नलिखित सुझाव बैठक में रखे जिनमें प्रमुख रूप से –

1) मुद्दा: देरी से कर भुगतान पर 18% या 24% ब्याज लिया जाता है, जबकि रिफंड पर केवल 6% ब्याज मिलता है। वर्तमान में इतनी ऊंची ब्याज दर करदाताओं के लिए अत्यधिक बोझिल है, विशेषकर वित्तीय संकट की स्थिति में। इससे अनुपालन में गिरावट और मानसिक तनाव उत्पन्न होता है।
सिफारिश:
बैंक ब्याज दरें घटकर 10% या उससे कम हो गई हैं, ऐसे में जीएसटी में ब्याज दर भी युक्तिसंगत होनी चाहिए।
अनुरोध है कि ब्याज दर या तो रिफंड पर देय दर के बराबर या उसकी 1.5 गुना हो, लेकिन 12% से अधिक न हो।

2) ऑडिट प्रक्रिया – धारा 74

निवेदन है कि केंद्रीय जीएसटी अधिकारी धारा 65 के तहत सामान्य ऑडिट कर रहे हैं, परंतु बाद में बिना धोखाधड़ी या तथ्य छुपाने का आरोप सिद्ध किए धारा 74 के तहत नोटिस (DRC-01) जारी कर रहे हैं, जो उचित नहीं है।

धारा 74 केवल तब लागू होनी चाहिए जब धोखाधड़ी, गलत विवरण या तथ्य छुपाने के साक्ष्य स्पष्ट रूप से हों।अतः अनुरोध है कि ऐसे मामलों में नोटिस धारा 73 के अंतर्गत ही जारी किए जाएं।

सचिव, वित्त एवं कराधान अधिवक्ता अंशुल रिंगसिया के द्वारा निम्नलिखित सुझाव दिया गया जिनमें प्रमुख रूप से –

1) कई कम्पोजिशन डीलर पूर्व वर्षों के GSTR-4 रिटर्न तकनीकी जानकारी की कमी व जागरूकता के अभाव में फाइल नहीं कर पाए। वर्तमान में जब तक पुराने रिटर्न फाइल नहीं होते, पोर्टल चालू वर्ष का रिटर्न स्वीकार नहीं करता, जिससे छोटे करदाताओं को कठिनाई हो रही है।

हम अनुरोध करते हैं कि लेट फीस ₹1,000 (सामान्य रिटर्न) व ₹500 (NIL रिटर्न) तक सीमित की जाए, जैसा कि अधिसूचना 73/2017 व 67/2020 में किया गया था।

2) ई-इनवॉयस जनरेट होने के बाद उसमें संशोधन की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है, जो करदाताओं के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। सिंहभूम चैम्बर सुझाव देते हैं कि सरकार ई-इनवॉयस पोर्टल पर संशोधन (Amendment) की सुविधा प्रदान करने पर विचार करे। इससे करदाता इनवॉयस की गलतियों को सीधे पोर्टल पर सुधार सकेंगे और इनवॉयस का विवरण GST पोर्टल पर दर्ज रिकॉर्ड्स के अनुरूप व सटीक बना रहेगा।

3) सिंहभूम चेंबर आग्रह करता है कि एडवांस रूलिंग प्राधिकरण को पुनः सक्रिय किया जाए, ताकि व्यापारियों को जीएसटी से जुड़ी स्पष्टता मिल सके और अनावश्यक विवाद से बचा जा सके। यह कदम पारदर्शिता व अनुपालन को बढ़ावा देगा।

सिंहभूम चैम्बर के उपरोक्त सुझावों पर ध्यान देते हुये चीफ कमिश्नर ने आश्वासन दिया जल्द ही बैठक आयोजित कर उपरोक्त मामलों को निष्पादित करने की दिशा में कार्य किया जायेगा।

उपरोक्त बैठक में सिंहभूम चैम्बर की तरफ से प्रतिनिधिमंडल में मानद महासचिव मानव केडिया, उपाध्यक्ष वित्त एवं कराधान अधिवक्ता राजीव अग्रवाल, सचिव अधिवक्ता अंशुल रिंगसिया के अलावा झारखण्ड राज्य के विभिन्न व्यापारिक संगठन जैसे फेडरेशन ऑफ़ झारखण्ड चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स,एशिया, झारखण्ड कमर्शियल टैक्स बार एसोसिएशन, झारखण्ड स्मॉल इंडस्ट्री एसोसिएशन, चार्टर्ड एकाउंटेंट ऑफ़ इंडिया के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

spot_img
spot_img
RELATED ARTICLES

ABOUT EDITOR IN CHIEF

Lb Shastri
मुख्य संपादक सह प्रोपराइटर पूर्व पत्रकार, प्रभात खबर और दैनिक भास्कर, जमशेदपुर

Most Popular

Recent Comments