वंचित वर्ग की सहायता के लिए शैक्षिक संस्थानों में शिक्षा के लिए तथा अवसर की समानता के लिए रोजगार के संबंध में विशेष प्रावधान किए गये हैं : सत्यदेव राम
संविधान ने ही हमें तमाम विभिन्नता के बावजूद एकता के सूत्र में बांध रखा है. हमें संगठित रहना होगा. सशक्त होकर ही हम नई परिभाषा गढ सकते हैं : डॉ ब्रज मोहन पट पिंगुआ
घाटशिला : सोना देवी विश्वविद्यालय घाटशिला के विवेकानन्द ऑडिटोरियम में आज संविधान निर्माता, भारत रत्न डॉ भीमराव रामजी अंबेडकर की जयंती मनाई गई. इस अवसर पर राजकीय पॉलिटेक्निक, सरायकेला के प्राचार्य सत्यदेव राम मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए. उन्होंने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि बाबा साहब ने अपने बाल्यकाल से ही अस्पृश्यता का सामना किया. स्कूली शिक्षा के दौरान भी उन्हें अन्य बच्चों से अलग बैठाया गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और शिक्षा के दम पर पूरे समाज को बदल दिया. उन्होंने शिक्षा हासिल करके देश विदेश में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई. कई भाषा के जानकार बाबा साहब ने दर्जनों पुस्तकें लिखी. वे अर्थशास्त्र के अच्छे जानकार थे. श्री राम ने कहा कि बाबा साहब ने सामाजिक समानता और अधिकारों तथा शिक्षा का प्रसार करने के लिए आजीवन संघर्ष किया. उन्होंने महिलाओं को अधिकार तथा सम्मान दिलाने के साथ ही उन्हें संपत्ति का अधिकार भी दिलवाया. बाबा साहब की ही देन है कि शैक्षिक संस्थानों में बालिकाओं को उनकी शिक्षा के लिए अलग अलग नाम से ही सही कई प्रावधान किए गये हैं और उन्हे वजीफा भी दिया जाता है. वंचित वर्ग की सहायता के लिए शैक्षिक संस्थानों में शिक्षा के लिए तथा अवसर की समानता के लिए रोजगार के संबंध में विशेष प्रावधान किए गये हैं. श्री राम ने कहा कि बाबा साहब ने ही समान कार्य के लिए समान वेतन का विचार दिया जिसे सही ढंग से लागू करने की अभी भी जरूरत है. बाबा साहब के प्रगतिशील विचारों के कारण उन्हें अपने ही देश में कई लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा. उन्होंने विद्यार्थियों के अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया तथा उन्हें पंथनिरपेक्ष शब्द का अर्थ समझाया. विशिष्ट पदों पर योग्यता के अनुसार चयन करने पर बल देते हुए मुख्य अतिथि श्री राम ने कहा कि अभी भी कई संवैधानिक प्रावधानों का अनुपालन सही ढंग से नहीं हो रहा है. इन्होंने कहा कि शिक्षकों की जवाबदेही भी तय करनी होगी.

इस अवसर पर सोना देवी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ ब्रज मोहन पट पिंगुआ ने कहा कि संविधान ने ही हमें तमाम विभिन्नता के बावजूद एकता के सूत्र में बांध रखा है. हमें संगठित रहना होगा. सशक्त होकर ही हम नई परिभाषा गढ सकते हैं.कुलसचिव डॉ नित नयना ने विषय प्रवेश कराया तथा राजनीति विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ शिव चन्द्र झा ने बाबा साहब के प्रति अपनी भावनाएं प्रकट करते हुए कहा कि वे सामाजिक न्याय के प्रतीक हैं विपरीत परिस्थितियों में उन्होंने संधर्ष किया और भारतीय संविधान की रचना की. अंबेडकर का प्रसिद्ध तीन-शब्दों वाला नाराः शिक्षित करो, आंदोलन करो, संगठित करो.. लाखों लोगों के लिए प्रेरणा के स्रोत बने हुए हैं, जो सामाजिक न्याय, शिक्षा, समानता और आत्मसम्मान के सार को समाहित करते हैं.इस कार्यक्रम की शुरूआत मंत्रोच्चार के साथ दीप प्रज्जवलन करके की गई. बीफार्म की छात्रा मौसमी महतो तथा रूमि दास ने मां सरस्वती को संबोधित गीत, वीणा वादिनी वर दे.. पर नृत्य प्रस्तुति दी. इस कार्यक्रम में इलेक्टिकल इंजीनियरिंग की छात्रा संजना मुंडा तथा बीएससी एग्रीकल्चर की छात्रा अंशु कुमारी ने बाबा साहब के प्रति अपने विचारों को अभिव्यक्त किया. कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन सहायक कुलसचिव अर्चना सिंह तथा संस्कृत विभाग की सहायक प्राध्यापक कुमारी निकिता ने संयुक्त रूप से किया. धन्यवाद ज्ञापन इतिहास विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ कंचन सिन्हा ने किया.


